इंफ्रा प्रोजेक्ट्स
में तेजी
से सुधरेगी
सीमेंट सेक्टर
की सेहत
बजट में
इंफ्रा और
रोड सेक्टर
पर खर्च
बढ़ाने के
प्रस्ताव से
सीमेंट सेक्टर
की उम्मीदें
बढ़ी हैं।
पिछले 3 साल
से सुस्ती
का सामना
कर रहे
सेक्टर को
उम्मीद है
कि नए
प्रोजेक्ट्स से
न केवल
मांग बढ़ेगी
साथ ही
ग्रामीण इलाकों
में आय
बढ़ने से
भी सेक्टर
को सहारा
मिलने की
उम्मीद है।
रोड सेक्टर
पर खर्च
बढ़ने से
उम्मीदें
रोड निर्माण
की नई
तकनीक में
कंक्रीट के
इस्तेमाल पर
जोर सीमेंट
सेक्टर के
लिए बड़ा
गेमचेंजर साबित
हो सकता
है। मोतीलाल
ओसवाल द्वारा
जारी रिपोर्ट
के मुताबिक
एनएचएआई द्वारा जारी करीब
75 फीसदी रोड
प्रोजेक्ट कंक्रीट
बेस्ड थे।
वही पहले
से रुके
हुए 4000 किलो
मीटर लंबी
रोड के
प्रोजेक्ट भी
कंक्रीट बेस्ड
होने की
उम्मीद है।
कंक्रीट से बनी रोड पर शुरुआती खर्च ज्यादा होता है लेकिन इनके रखरखाव पर खर्च कम होता है वहीं ये ज्यादा समय तक चलती हैं। कंक्रीड बेस्ड रोड की इन्ही खासियत की
वजह से उम्मीद है कि रोड प्रोजेक्ट के बड़े हिस्से से सीमेंट कंपनियों को फायदा मिलेगा।
ग्रामीण सेक्टर
में खर्च
बढ़ने से
मिलेगा सहारा
बजट में
ग्रामीण इलाको
में खर्च
बढ़ने के
प्रस्ताव से
भी सीमेंट
कंपनियों को
सहारा मिला
है। कैबिनेट
ने रूरल
हाउसिंग स्कीम
को मंजूरी
दे दी
है। इसमें
2016-17 से से
2018-19 के बीच
82 हजार करोड़
रुपए ग्रामीण
इलाकों में
घर बनाने
पर खर्च
किए जाने
की योजना
है। इसके
साथ ही
पे कमीशन
की वजह
से हाउसिंग
डिमांड बढ़ने
की उम्मीद
है, जिसका
सीमेंट सेक्टर
को फायदा
मिल सकता
है। बोनांजा
पोर्टफोलियो को
एवीपी रिसर्च
पुनीत किनरा
के मुताबिक
इंफ्रा और
रुरल सेक्टर
को लेकर
बजट प्रस्तावों
से से उम्मीद है कि सीमेंट सेक्टर की कंपनियों को आगे फायदा होगा जिससे इनके शेयरो में आगे ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
जून के
बाद से
सुधरेगी सीमेंट
कंपनियों की
सेहत
रेलीगेयर कैपिटल
मार्केट्स ने
अनुमान दिया
है कि
लार्ज कैप
कंपनियों की
आय पर
दबाव जल्द
खत्म हो
सकता है।
कस्ट्रक्शन एक्विटी
में तेजी
और बेहतर
कीमतों की
मदद से कंपनियों की
आय में
बढ़त देखने
को मिल
सकती है।
वहीं, रिलायंस
सिक्युरिटीज ने
अनुमान दिया
है कि
मांग बढ़ने
के साथ
कीमतों में
खासतौर पर
उत्तर भारत
में बढ़त
देखने को
मिल सकती
है। ब्रोकिंग
फर्म के
मुताबिक उत्तर
भारत में
पिछले 2 तीन
साल में
उत्पादन क्षमता
में कोई
खास बढ़त
देखने को
नहीं मिली
है।
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